मैं निर्भया :
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भारत की बेटी
काटो न मोहे पर , मोहे उड़ने दो
कुछ हसीन ख़्वाब मुझे बुनने दो
नहीं चाहती मैं वो मौसम पुराने
नये लफ़्ज़ मुझे चुनने दो
काटो न मोहे पर , मोहे उड़ने दो
ये बासे रीत- रवाज़ और ये अडम्बर
ढोयुगी न मैं अब ,
अब मुझे अपनी राहों पर चलने दो
बाबुल पर बोझ बनुगी कब तक
मोहे लाज को अब मरने दो
काटो न मोहे पर, मोहे उड़ने दो
कब तक बैठी रहुगी, अश्को के सेज़ पर
कब तक सहती रहुगी, प्रथाओं की लोह को
अब मुझे उस आंतक से लड़ने दो
तुफ़ा भरा है अंदर, तुफ़ा मुझे बनने दो
कोई देवी रूप न पूजे मोहे
अब मोहे 'औरत' बनने दो
काटो न मोहे पर, मोहे उड़ने दो
तुम शायद जानते नहीं
तुम्हारी जननी मैं ही हूँ
तुम्हारे हवस से भरे इस जिस्म को
सींचा है मैंने खुद को दर्द में रखकर
मेरा दुध है अमृत,
जिसने तुम्हें ताकतवर बनाया है
तुम्हारे अस्तित्व पर माँ का ऋण है बाकी
पर तुम ने कौन सा कर्तव्य अपना निभाया है
तुम्हारी दुनिया पर अधिकार है मेरा
तुम्हारे हर रिश्ते पर नाम है मेरा
मैं माँ हूँ, बेटी हूँ , पत्नी हूँ
इज्ज़त कहते हो घर की और
लूटते भी हो
ज़ख्म देते भी हो और
मन्दिरों में पूजते भी हो ।।
अब ओर नहीं चाहत ऐसी
हमें खुद का आसमाँ बनाने दो
अब बस 'निर्भया' ओर न मरे
अपना कारवाँ बनाने दो
बता दो अब भारत की बिटियाँ
हर मंज़िल को अब पाने दो
नहीं चाहती मैं मौसम पुराने
नयी बुंदो को अब गिरने दो
नये लफ़्ज़ मुझे चुनने दो
काटो न मोहे पर , मोहे उड़ने दो
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